रिषिकेष, मार्च 16 -- जैन धर्म की साध्वी श्री 105 आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि दुख का मूल कारण अज्ञान है। कट्टरता पैदा करना धर्म नहीं है। आज विश्व में जो स्थिति है उसका समाधान क्षमा धर्म में निहित है। सोमवार को हरिद्वार मार्ग स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री 108 विद्या सागर महाराज की शिष्या 105 आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ और मोह दुख के मूल कारण है। जो प्राप्त है वह पर्याप्त है। इस भाव से जो व्यक्ति आगे बढ़ता है वह परहित, समाज हित में काम करता है। स्वजन लोगों को बिना लक्ष्य के कोई काम नहीं करना चाहिए। कट्टरता पैदा करना धर्म नहीं है। अज्ञानता मिटाने को धर्म है। आज विश्व में कई जगहों पर युद्ध चल रहे हैं। इसका भी समाधान क्षमा धर्म में है। उन्होंने कहा कि परिवारों का विघटन चिंताजनक है...