कटान रोकने के नाम पर अरबों खर्च, फिर भी राहत नहीं
बलिया, जुलाई 5 -- बलिया, संवाददाता। जिले से होकर बहने वाली दो प्रमुख नदियों गंगा व घाघरा ने अब तक न जाने कितने गांवों को उजाड़ चुकी है। हजारों एकड़ भूमि पानी में समाहित हो चुकी है। आशियाने व आजिविका के बर्बाद होने का दर्द पिड़ित लोगों के मौन सालों साल कौधता है। हालांकि नदियों से होने वाला कटान अधिकारियों व ठेकेदारों के लिये पैसा कमाने का उद्योग बना हुआ है।साल 1999 में गंगा व घाघरा का रूख आबादी की ओर होने के बाद प्रदेश के तत्कालिन सरकार ने गंगा नदी के मझौवा में स्पर निमार्ण कार्य का शुभारम्भ किया। शुरुआती दौर में नदी से होने वाली कटान को रोकने के लिये बोल्डर डाला जाता था। यह भी पढ़ें- Munger News: लोहापुल बांध का जीर्णोद्धार नहीं होने से हर साल बाढ़ की मार झेल रहे ग्रामीण हालांकि बाद में तकनीकी में कुछ बदलाव करते हुये बोल्डर को लोहे की जाली म...
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