सासाराम, अगस्त 6 -- विक्रमगंज, निज संवाददाता। जिले में धान रोपनी का कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है। सावन की रिमझिम फुहार और हरियाली के बीच खेतों में काम कर रहीं महिलाएं कजरी, झूमर और ठुमर गाकर माहौल को संगीतमय बना रही हैं। हंसी-ठिठोली, ताने और ठहाकों के बीच गूंजते लोकगीतों से बधार गुलजार हो उठे हैं। राहगीर भी इन गीतों को सुनने के लिए खेतों के किनारे ठहर जा रहे हैं। यह भी पढ़ें- सावन में कजरी की मिठास हुई फीकी, लोक परंपरा को बचाने की जरूरतगीतों का महत्व रोपनी के दौरान गाए जा रहे गीतों में सावन का श्रृंगार, पति-पत्नी का प्रेम, ननद-भौजाई की नोकझोंक, सास के उलाहने और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों का जीवंत चित्रण सुनने को मिल रहा है। महिलाएं समूह में गीत गाती हैं, जिसमें एक महिला मुखड़ा उठाती है और बाकी महिलाएं उसे दोहराती हैं। इससे श्रम की थक...