कई वर्षों तक रात-दिन दंडवत करने के बाद पूरी होती है गिरि परिक्रमा
मथुरा, जुलाई 29 -- गोवर्धन, सात कोस में विराजमान गिरिराज पर्वतराज की दंडवती परिक्रमा श्रद्धा, कठिनतम साधना और पूर्ण समर्पण का अद्वितीय स्वरूप मानी जाती है। यहां गिरिराज परिक्रमा करने के लिए अलग-अलग रूप हैं। इनमें पैदल परिक्रमा, दंडवती परिक्रमा, दुग्धधार परिक्रमा और धूप परिक्रमा प्रमुख हैं। इनमें दंडवती परिक्रमा सबसे कठिन मानी जाती है। इसमें श्रद्धालु 21 किलोमीटर लंबी सात कोस परिक्रमा दंडवत करते हुए पूर्ण करते हैं। यही नहीं एक ही स्थान पर कोई 108 तो कोई 1008 दंडवत करने परिक्रमा कर रहा है। ऐसे परिक्रमार्थियों की कई-कई वर्ष बीतने के बाद भी एक गिरि परिक्रमा पूरी नहीं हो सकी है। गिरिराज महाराज की सात कोस की दंडवती परिक्रमा भक्त 1, 108, 111, 551 अथवा 1,108, 1008 दंडवत के संकल्प के साथ आरंभ करते हैं। एक दंडवत वाले संकल्प में श्रद्धालु प्रत्येक स...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.