कंठे महाराज की स्मृति में गूंजे शास्त्रीय स्वर
वाराणसी, अगस्त 2 -- वाराणसी, संवाददाता। काशी को संगीत और साहित्य की नगरी कहा जाता है, किंतु इससे भी आगे बढ़कर वह नाद और लय की राजधानी है। यह राजधानी तबले के अनेक साधकों की साधना-भूमि है। उन साधकों में पंडित कंठे महाराज अन्यतम हैं। वह नाद की राजधानी के राजदूत हैं।
समारोह का विवरण नागरी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने ये बातें ताल-शिरोमणि पंडित कंठे महाराज की पुण्यतिथि के अवसर संगीत सभा और रूपवाणी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भजन संध्या में स्वागत भाषण देते हुए कहीं। श्री शुक्ल ने कहा कि अपने गुरु पंडित बलदेव सहाय के वह जितने योग्य शिष्य थे, वैसे ही योग्य शिष्य उन्होंने स्वयं तैयार किए। इसके पहले पंडित पूरन महाराज ने परिजनों और शिष्यों के साथ अपने पितामह और गुरु पंडित कंठे महाराज जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। तदु...
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