औरैया, अगस्त 20 -- पैर में फंसी गोली करीब छह साल तक संजय चौबे को उस खौफनाक दिन की याद दिलाती रही, जब उनकी आंखों के सामने भाई मंजुल चौबे और बहन सुधा की हत्या कर दी गई थी। परिवार और रिश्तेदारों ने कई बार ऑपरेशन कराकर गोली निकलवाने की सलाह दी, लेकिन संजय ने ठान लिया था कि जब तक भाई-बहन के हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती, वह पैर में फंसी गोली नहीं निकलवाएंगे। उन्होंने दर्द सहना मंजूर किया, लेकिन न्याय की लड़ाई से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। दोहरे हत्याकांड में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक और उनके भाई समेत 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलने के बाद गुरुवार को संजय ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में कहा कि उनका संकल्प पूरा हो गया। अब वह ऑपरेशन कराकर पैर में फंसी गोली निकलवाएंगे। दोहरे हत्याकांड की घटना संजय के लिए केवल एक मुकदमा नहीं, बल्कि जिंदगीभर न भूल...