औरैया, जुलाई 24 -- सरिता देवी हत्याकांड में सुनाया गया फैसला केवल सजा का आदेश नहीं, बल्कि तीन साल तक चली न्यायिक पड़ताल का नतीजा है। 43 पन्नों के फैसले में अदालत ने एक-एक साक्ष्य, गवाह और मेडिकल रिपोर्ट का विस्तार से विश्लेषण किया। अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपी को झूठा फंसाने का दावा किया। लेकिन अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला को मजबूत मानते हुए आरोपी सरमन सिंह को दोषी ठहराया। मुकदमे की शुरुआत 10 मार्च 2023 को एफआईआर दर्ज होने से हुई। विवेचना पूरी होने के बाद 3 मई 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया गया और 14 अगस्त 2023 को अदालत ने हत्या का आरोप तय कर सुनवाई शुरू की। इसके बाद तीन वर्षों तक लगातार गवाहों की गवाही, जिरह और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच होती रही। जुलाई 2026 में अदालत ने अंतिम फैसला सुनाया。 ...