नई दिल्ली, सितम्बर 9 -- राजस्थान की सियासत में तीसरी शक्ति का सपना कोई नया नहीं है। इस बार हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी की आवाज भी बाड़मेर तक पहुंची। आह्वान हुआ कि हनुमान बेनीवाल को राजस्थान में तीसरी ताकत बनाया जाए। बात सुनने में दमदार है... लेकिन सियासत में सिर्फ आह्वान से ताकत नहीं बनती। उसके लिए बूथ पर खड़ा कार्यकर्ता, मैदान में डटा प्रत्याशी और आखिरी वक्त तक साथ निभाने वाला संगठन चाहिए। और यहीं बाड़मेर में आरएलपी की कहानी कुछ ऐसी नजर आई, जैसे चुनावी मैदान में पार्टी को विपक्ष से ज्यादा अपने ही 'दिन-मान' से जूझना पड़ रहा हो।नामांकन भरा... फिर नाम वापसी की लाइन में पहुंच गए कहानी शुरू होती है एक प्रत्याशी धर्माराम से। पार्टी ने भरोसा जताया और उन्हें मैदान में उतारा। लेकिन चुनावी मुकाबला शुरू होने से पहले ही कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि धर्...