रांची, मार्च 15 -- रांची, संवाददाता। एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी का असर अब सामाजिक संस्थानों पर भी साफ दिखने लगा है। शहर के कई ओल्ड ऐज होम, ब्लाइंड स्कूल और दिव्यांग बच्चों के आश्रय गृहों में सिलेंडर की कमी के कारण भोजन बनाने में परेशानी हो रही है। कई संस्थानों को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कोयला और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इन संस्थानों में प्रतिदिन 150 से 300 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, ऐसे में एक सिलेंडर औसतन छह से सात दिन ही चल पाता है। संस्थानों के संचालकों का कहना है कि गैस की नियमित आपूर्ति नहीं होने से सामाजिक संस्थानों के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। उन्होंने प्रशासन और गैस एजेंसियों से मांग की है कि ऐसे संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए, ताकि बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों...
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