नई दिल्ली, अगस्त 15 -- हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा- यह कोई नारा नहीं है, हालांकि इसे उपदेश देने या नारे के रूप में ही ज्यादा इस्तेमाल किया गया, जबकि यह तो विशुद्ध जीवन-दर्शन है। अध्यात्म में सूक्ष्म धरातल पर ही नहीं, एक सभ्य नागरिक, मनुष्य बनने की कसौटी पर भी। हर कोई अपने आप को संवारने, श्रेष्ठ बनाने में जुट जाए, तो किसी परिवार, समाज, राष्ट्र और इस दुनिया को स्वर्ग बनने से कौन रोक लेगा? यह कहना आसान है, करना बहुत कठिन, क्योंकि इसके लिए पहली कुर्बानी अपनी अना की देनी होगी। दादासाहेब भगत ने यही किया, अपने अहंकार को बाजू में रखा, कर्म की पूजा की और देश के लिए मिसाल बन गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में इनकी खूब सराहना की। महाराष्ट्र का बीड जिला अक्सर सूखाग्रस्त होने के कारण देश-दुनिया में सुर्खियां बटोरता रहा है। यहीं ...