नई दिल्ली, मई 6 -- सैयद अता हसनैन,राज्यपाल, बिहार ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ केवल एक तारीख नहीं है, यह भारत की रणनीतिक सोच में निर्णायक बदलाव पर विचार करने का क्षण है। 7 मई, 2025 की घटनाएं एक सफल सैन्य अभियान से कहीं अधिक थीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य तैयारी, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय संकल्प के समन्वय को देश-दुनिया के सामने रेखांकित किया। कई मायनों में ऑपरेशन सिंदूर को भविष्य के संघर्ष संचालन के एक सटीक प्रारूप के रूप में याद किया जाएगा। दशकों तक सीमा-पार की उकसावे की घटनाओं पर भारत की प्रतिक्रिया अक्सर स्व-निर्धारित संयम में सीमित रहती थी। ऑपरेशन सिंदूर ने संयम त्यागने का नहीं, बल्कि इसके परिष्कार को रेखांकित किया। इसने भारत की संवेदनशीलता के साथ बल-प्रयोग करने की क्षमता को प्रदर्शित किया। राजनीतिक नेतृत्व ने न केवल कार्रव...
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