ऑपरेशन विजय के सबक हमारे बहुत काम आए
नई दिल्ली, जुलाई 25 -- मोहन भंडारी, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) भारतीय सेना और हमारी सूचना एजेंसियों के लिए कारगिल की लड़ाई एक अप्रत्याशित आघात के रूप में आई थी। आज जब हम कारगिल युद्ध में विजय की 27वीं सालगिरह मना रहे हैं, तब हमें यह समझने की जरूरत है कि लगभग 11 हफ्तों तक चली वह लड़ाई क्या थी? एक सीमित सशस्त्र युद्ध या कुछ और? इस जंग की एक आश्चर्यजनक बात यह भी थी कि जब दोनों देशों की सेनाएं लड़ रही थीं, तब भी भारत और पाकिस्तान में पूर्ण कूटनीतिक संबंध कायम थे। पाकिस्तान के लिए तो यह 1947-48 के जम्मू-कश्मीर युद्ध, 1965 व 1971 के युद्धों के बाद एक और शर्मनाक हार थी। शृंखला में चौथी। कारगिल की करारी हार ने पाकिस्तान सरकार, प्रतिपक्ष और उसके पालतू आतंकवादी संगठनों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था, विशेषकर उन वर्गों के बीच, जो भारतीय सैन्य ताकत के...
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