लखनऊ, अप्रैल 2 -- ऑटिज्म के लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगते हैं। बच्चे का नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता है। आंखों में संपर्क से बचता है। बोलने में देरी, बार-बार एक ही व्यवहार दोहराता है। यदि ये लक्षण नजर आएं तो माता-पिता को सर्तक हो जाना चाहिए। समय पर जांच व इलाज से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। बच्चा को काफी हद तक आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। यह जानकारी बलरामपुर अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या ने दी। वह गुरुवार को बलरामपुर अस्पताल में ऑटिज्म जागरुकता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।निदेशक डॉ. कविता आर्या ने कहा कि ऑटिज्म का पूर्ण इलाज नहीं है। लेकिन नियमित थेरेपी, विशेष शिक्षा और परिवार के सहयोग से बच्चों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। सीएमएस डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि आटिज्म पीड़ित बच्चे बोलने में देर...