दिल्ली, मई 17 -- पश्चिम एशिया संकट और महंगे तेल के कारण भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है.सरकार और रिजर्व बैंक हस्तक्षेप कर रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेश निकासी और बढ़ते घाटे से दबाव बना हुआ है.पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़ी बढ़ती तेल कीमतों के बीच भारत अपनी गिरती मुद्रा रुपये को संभालने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है.देश की अर्थव्यवस्था, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है, इस दबाव के कारण अस्थिरता झेल रही है.रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी में संकट शुरू होने के बाद से रुपया पांच प्रतिशत से अधिक कमजोर हुआ है.इस गिरावट के कारण 2025 से चली आ रही कमजोरी इस कदर बढ़ गई है कि रुपया 2026 में एशिया की प्रमुख मुद्राओं में इसे सबसे कमजोर हो गया है.शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96 से ऊपर के स्त...