नई दिल्ली, अक्टूबर 23 -- आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य के विश्वविद्यालय एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों को केवल इस आधार पर अयोग्य नहीं ठहरा सकते कि कॉन्ट्रेक्ट या नॉन रेगुलर नौकरी के दौरान उन्हें परमानेंट असिस्टेंट प्रोफेसरों के मुकाबले कम वेतन मिला था। कोर्ट ने विश्वविद्यालयों को ऐसे अभ्यर्थियों के आवेदनों पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2018 के नियमों के तहत निर्धारित वेतन या कुल पारिश्रमिक की शर्त को हर मामले में पात्रता पर रोक लगाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अभ्यर्थियों के जरूरी टीचिंग एक्सपीरियंस पर कोई विवाद न हो। जस्टिस न्यापति विजय ने यह आदेश शिक्षकों की ओर से दायर याचिकाओं के एक समूह का निपटारा ...