नई दिल्ली, जून 5 -- नवनीत सहगल,पूर्व चेयरमैन, प्रसार भारती किसी भी जीवंत लोकतंत्र की प्राणवायु उसके नागरिकों के विश्वास में निहित होती है। यह विश्वास इस बात पर टिका होता है कि प्रत्येक नागरिक के वोट का मूल्य समान है और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से निष्पक्ष। अवैध व फर्जी वोटों की उपस्थिति वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों का हनन करती है। ऐसे में, जब भारत का निर्वाचन आयोग मतदाता सूची की इन विसंगतियों को दूर करने के लिए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) जैसा व्यापक अभियान चलाता है, तो उसके विरुद्ध होने वाला राजनीतिक शोर गंभीर सवाल खड़े करता है। मतदाता सूची को शुद्ध करना महज प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतंत्र की सबसे प्राथमिक शर्त है। आजकल राजनीतिक विमर्शों में यह माहौल बनाया जा रहा है, मानो एसआईआर कोई अचानक थोपी गई, नई ...