काठमांडू, जून 20 -- दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना इंसानी जज्बे की सबसे बड़ी परीक्षा है। लेकिन उससे भी बड़ी परीक्षा है- वहां से किसी को वापस लाना, खासकर तब जब वह 'डेथ जोन' में 30 साल से बर्फ में दबा हो। भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जांबाजों से जुड़े 1996 के उस ऐतिहासिक और दर्दनाक हादसे के पूरे 30 साल बाद, यह विषय एक बार फिर दुनिया भर के पर्वतारोहियों और शेरपाओं के बीच रोंगटे खड़े कर देने वाली चर्चा का विषय बन गया है। आखिर 8,000 मीटर की उस जानलेवा ऊंचाई पर ऐसा क्या है जो दुनिया के सबसे बेहतरीन पर्वतारोहियों के भी पसीने छुड़ा देता है? आइए समझते हैं इस अकल्पनीय रेस्क्यू मिशन की वैज्ञानिक और भौगोलिक चुनौतियां और 1996 के उस खौफनाक तूफान की पूरी कहानी।1996 का वो काला दिन: जब एवरेस्ट ने ली थी जांबाजों की परीक्षा मई 1996 का...