भागलपुर, मार्च 17 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। रसोई गैस (एलपीजी) की बढ़ी किल्लत और आपूर्ति में बाधा ने आम जनजीवन को पारंपरिक संसाधनों की ओर मोड़ दिया है। शहर में जारी एलपीजी गैस संकट का सीधा असर अब बाजार पर भी दिखने लगा है, जहां मिट्टी के चूल्हों और तंदूर की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है। स्थिति यह है कि जो चूल्हे कभी केवल ग्रामीण क्षेत्रों या विशेष आयोजनों तक सीमित थे वे अब बड़े होटलों, हॉस्टल और कैटरिंग व्यवसाय की मजबूरी बन गए हैं।शहर के डॉ. आरपी रोड स्थित खलीफाबाग चौक के समीप चूल्हा पट्टी इन दिनों ग्राहकों से गुलजार है। यहां के चूल्हा निर्माता संतोष कुमार साह बताते हैं कि सामान्य दिनों में बमुश्किल 3 से 4 चूल्हों की बिक्री हो पाती थी। यहां तक कि भीषण ठंड के समय भी यह आंकड़ा 7-8 तक ही पहुंचता था। लेकिन वर्तमान में एलपीजी की किल्लत के चल...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.