रांची, जुलाई 1 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के दो जिला सहकारिता पदाधिकारियों को नियमित प्रोन्नति नहीं दिए जाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) का लाभ नियमित प्रोन्नति का विकल्प नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी कर कनिष्ठ अधिकारियों को प्रोन्नति देना संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार को प्रार्थियों के मामलों को विभागीय प्रोन्नति समिति (डीपीसी) के समक्ष रखकर कानून एवं नियमों के अनुरूप निर्णय लेने का निर्देश दिया है। प्रार्थी जगमनी टोप्पो और उमेश कुमार सिन्हा की ओर से अदालत को बताया गया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2008 में सहायक निबंधक/जिला सहकारिता पदाधिकारी के पद पर हुई और वर्ष 2...