मुंगेर, अप्रैल 17 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। रबी और खरीफ सीजन में कटाई शुरू होते ही किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि फसल कहां बेची जाए। सरकारी क्रय केंद्र, स्थानीय आढ़ती या बड़ी निजी कंपनियां,विकल्प तीनों हैं, पर हर रास्ते के साथ मजबूरियां और जोखिम भी बंधे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी अधिकांश किसान स्थानीय आढ़तियों को ही अनाज बेचने को मजबूर हैं। वजह सीधी है कि तुरंत नकद भुगतान, घर के पास तौल और कागजी झंझट से आजादी रहती है। धरहरा के किसान विनोद सिंह कहते हैं, कि पैक्स केंद्र 15 किलोमीटर दूर है। यह भी पढ़ें- एमएसपी के भरोसे और बाजार की मजबूरियां: बिचौलियों के हवाले किसान का अनाज वहां जाओ तो टोकन लो, नमी चेक कराओ, फिर 20 दिन भुगतान का इंतजार करो। आढ़ती खेत से ही उठा लेता है और हाथों-हाथ पैसा दे देता है। 200 र...
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