नई दिल्ली, अप्रैल 10 -- भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उच्च-स्तरीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की पहचान करने के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव किया। इसके तहत पिछली मानक-आधारित प्रणाली के बजाय संपत्ति आधार को अपनाने और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाली एनबीएफसी को अपर लेयर माना जाएगा। आरबीआई की वेबसाइट पर जारी ड्राफ्ट में कहा गया कि एनबीएफसी- अपर लेयर की पहचान के लिए पारदर्शी, सरल और पूर्ण मानदंड अपनाने के लिए मौजूदा पद्धति को संपत्ति के आकार के मानदंड से बदलने का प्रस्ताव है, जो इस समय एक लाख करोड़ रुपये और उससे अधिक प्रस्तावित है।टाटा संस की लिस्टिंग की है चर्चा यह ड्राफ्ट ऐसे समय में आया है जब नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बना...
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