नई दिल्ली, जून 22 -- अभी हाल में बिहार में भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर हुआ है। पूरे फेसबुक पर यह विषय वायरल है। मैं ज्यादा नहीं जानता, लेकिन जो थोड़ी-बहुत जानकारी मिली है, उससे लगता है कि उसने ऐसा अपराध नहीं किया था, जिसके लिए एनकाउंटर किया जाए। आत्म-समर्पण करने के बाद तो दर्जनों हत्या करने वाले डाकुओं की भी जान बख्श दी जाती थी। कुछ साल पहले एक वरिष्ठ हिंदी लेखिका से मेरी इसी मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी। मैं कह रहा था कि यह तरीका सही नहीं है, लेकिन वह एनकाउंटर को सही ठहरा रही थीं। आखिरकार नतीजा यह हुआ कि उन्होंने मुझे अनफ्रेंड कर दिया। मैं चीजें फिल्मों से समझाऊंगा, क्योंकि फिल्मों का समाज पर बहुत असर होता है। परदे पर आंखें फोड़ देने वाला 'गंगाजल' जैसा चलन बहुत अच्छा लगता है। आमतौर पर सबको पसंद भी आता है, लेकिन इसके नतीजे बेहद भयानक होते हैं।...