मुजफ्फरपुर, फरवरी 26 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। सरकारी अस्पतालों में एचआईवी पीड़ितों का प्रसव कराने से कन्नी काटा जा रहा तो उनके बच्चों को परवरिश योजना से मिलने वाला लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के परियोजना निदेशक ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। परियोजना निदेशक ने पिछले दिनों सदर अस्पताल और एसकेएमसीएच का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक सदर अस्पताल में तीन साल से एचआईवी पीड़ित गर्भवतियों का प्रसव नहीं कराया जा रहा है। यहां तक कि प्रसव पूर्व जांच में गर्भवती की एचआईवी की जांच नहीं की जा रही है। परियोजना निदेशक ने सदर और एसकेएमसीएच प्रशासन को एचआईवी की जांच नहीं होने पर कड़ी फटकार लगायी है। साथ ही मुजफ्फरपुर को एचआईवी की जांच और इलाज में फिसड्डी बताया है। उन्होंने सिविल सर्जन को एचआईवी पीड़ितों के ऑपरेशन और ...