रांची, अगस्त 20 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से करीब 36 वर्ष पुराने अतिरिक्त वेतन की वसूली नहीं की जा सकती, खासकर तब, जब उसके खिलाफ विधि सम्मत विभागीय कार्रवाई में उस आरोप का दोष सिद्ध न हुआ हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महज फर्जीवाड़े का आरोप लगाकर किसी कर्मचारी के वेतन या सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ को नहीं रोका जा सकता। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश के अधिकांश हिस्सों में बरकरार रखा। हालांकि, खंडपीठ ने कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने पर लगाई गई रोक को हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कृत्य के आरोप में एफआईआर दर्ज करने से कानून किसी कर्मचारी को स्वत: संरक्षण नहीं देता। वर्ष 2011 में...