एक साल बाद अस्पताल से छुट्टी लेकिन भूला नाम पता, शेल्टर होम नया ठिकाना
लखनऊ, अगस्त 21 -- करीब एक साल पहले ट्रेन से गिरा एक किशोर गंभीर हालत में केजीएमयू पहुंचा था। सिर में इतनी गंभीर चोट थी कि डॉक्टरों ने अगले ही दिन ऑपरेशन किया। जिंदगी तो बच गई, लेकिन याददाश्त और बोलने की क्षमता पूरी तरह वापस नहीं आ सकी। अब वह खुद खाना खाता है। टॉयलेट जाता है। अस्पताल में मिलने वाले हर व्यक्ति को मुस्कुराकर नमस्ते करता है। बस अपनी पहचान और घर का पता आज भी नहीं बता पाता। यह कहानी करीब 18 वर्षीय उस युवक की है, जो सात अगस्त 2025 को बाराबंकी में ट्रेन से गिर गया था। पुलिस कांस्टेबल उसे उसी दिन केजीएमयू लेकर पहुंचे। सीटी स्कैन में सिर में गंभीर चोट मिली। न्यूरोसर्जरी विभाग ने आठ अगस्त को उसका ऑपरेशन किया। धीरे-धीरे हालत सुधरी, लेकिन वह स्पष्ट बोल नहीं पाया। डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उसकी पहचान के लिए हर संभव प्रयास किया। एनेस्थ...
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