धौलपुर, अगस्त 12 -- चंबल किनारे बुधवार को सिर्फ छह चिताएं नहीं जलीं, छह परिवारों की खुशियां भी राख हो गईं। एक के बाद एक छह अर्थियां मुक्तिधाम पहुंचीं तो धौलपुर की आंखें नम हो गईं। किसी अर्थी पर पत्नी थी, किसी पर मां-बेटा और किसी पर वह पिता, जिसकी उंगली पकड़कर बेटे ने चलना सीखा था। मंगलवार को हुए दो सड़क हादसों ने छह जिंदगियां छीन लीं और बुधवार को पूरा शहर इन परिवारों के दुख में शामिल हो गया। सबसे दर्दनाक दृश्य सरिया व्यवसायी राजकुमार जैन के अंतिम संस्कार के दौरान दिखा। बेटे मयंक ने जब अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी तो उसके हाथ कांप रहे थे। आसपास खड़े लोग इस दृश्य को देखकर अपने आंसू नहीं रोक सके। जिस पिता के सहारे मयंक ने जिंदगी की राह सीखी, उसी पिता को अंतिम विदाई देने की घड़ी उसके सामने थी।दो दिन पहले घर में थीं खुशियां, अब पसरा मातम प...