नई दिल्ली, फरवरी 24 -- सुधांशु रंजन, वरिष्ठ टीवी पत्रकार भारत में जाति एक दहनशील मुद्दा है। इसको लेकर की गई किसी भी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद का शांत होना कठिन होता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के एक हालिया साक्षात्कार पर हंगामा खड़ा हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नए नियम को गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि दलित और अश्वेत हमेशा पीड़ित बनकर या 'विक्टिम कार्ड' खेलकर प्रगति नहीं कर सकते। इस बयान पर जब विवाद हुआ, तो उन्होंने कहा कि वह स्वयं बहुजन हैं। वैसे, शांतिश्री की बात गंभीर विमर्श की मांग करती है। इस पर हंगामा खड़ा करने वालों को भी ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए। भारत में जातिगत भेदभाव रहा है और इसकी कठोरतम शब्दों में भर्त्सना होनी चाहिए,...
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