प्रयागराज, अप्रैल 1 -- Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि भरण-पोषण मामले में पारित एकतरफा अंतरिम आदेश को चुनौती देते समय पक्षकार मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर बहस नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसी चुनौती का दायरा केवल यह साबित करने तक सीमित होता है कि उसे नोटिस नहीं मिला था या उसके अनुपस्थित रहने का पर्याप्त कारण था। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने पति राकेश कुमार शर्मा द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। मामले में ट्रायल कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 4000 रुपये देने का आदेश दिया था। यह आदेश एकतरफा पारित हुआ था जिसे वापस लेने की पति की मांग ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज की थी कि उसे विधिवत नोटिस दिया गया लेकिन वह अदालत में उपस्थित नहीं ह...
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