अलीगढ़, अक्टूबर 1 -- अलीगढ़। वरिष्ठ संवाददाता अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का कैंपस इन दिनों एक अलग ही मिजाज में है। छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से चल रहा यह प्रदर्शन किसी पुरानी लकीर का फकीर नहीं है। यहां न पत्थरबाजी है, न नारेबाजी का वह पुराना और थका हुआ शोर। इसके बजाय, यहां गिटार की तान है, म्यूजिक सिस्टम पर बजते 'हम देखेंगे' जैसे क्रांतिकारी तराने हैं और प्रशासन को घेरने के लिए 'डिजिटल सत्याग्रह' का सहारा लिया जा रहा है।धरना स्थल अब केवल एक विरोध प्रदर्शन की जगह नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र में बदल गया है। रात के सन्नाटे में, जब प्रशासन को उम्मीद होती है कि छात्र थककर सो गए होंगे, तब धरना स्थल पर क्रिकेट का मैच शुरू हो जाता है। यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि छात्रों की अपनी एक ऐसी दुनिया है जहां संघर्ष के ...