लखनऊ, अप्रैल 3 -- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बदलाव ला रही है। एआई की मदद से स्तन कैंसर की पहचान शुरुआती स्तर पर ही संभव हो सकेगी। जिससे मरीजों के इलाज की सफलता दर में सुधार होगा। हालांकि एआई पर बहुत आंख बंद कर भरोसा करने से बचना चाहिए। यह जानकारी पीजीआई इंडोक्राइनो सर्जरी विभाग के डॉ. ज्ञानचन्द्र ने दी। वह शुक्रवार को पीजीआई के प्रेक्षागृह में ब्रेस्ट कोर्स 2026 को संबोधित कर रहे थे। डॉ. ज्ञानचन्द्र ने कहा कि एआई तकनीक मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का सूक्ष्म विश्लेषण कर सकती है। यह पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सटीकता से छोटे से छोटे बदलावों को पहचानने में सक्षम है। इससे कैंसर के शुरुआती संकेतों को पकड़ना आसान हो जाएगा। जो कई बार सामान्य जांच में छूट जाते हैं।डॉ. ज्...