गोरखपुर, मार्च 24 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। एम्स के नेत्र रोग विभाग की टीम ने डायबिटिक रेटिनोपैथी मरीजों में मिलने वाली गंभीर डीआरआईएल (डिसॉर्गनाइजेशन ऑफ रेटिनल इनर लेयर्स) बीमारी में एआई का इस्तेमाल कर रेटिना के सटीक नुकसान की पहचान की है। विशेषज्ञों ने रिसर्च पेपर को जयपुर में हुए ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी (एआईओएस) के कांफ्रेंस में प्रस्तुत किया। पेपर को बेस्ट आईजीओ अवार्ड देकर सम्मानित किया गया है।शोध पत्र की प्रस्तुति में अहम भूमिका निभाने वाली नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अलका त्रिपाठी ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी मरीजों में डीआरआईएल रेटिना की आंतरिक परतों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। इस बीमारी में रेटिना की अंदरूनी परतें खराब हो जाती है, जिसकी वजह से मरीज को कम या फिर धुंधला दिखाई देने लगता है। एम्स में ऐसे मरीजों का इ...