देहरादून, जुलाई 25 -- देहरादून । प्रमुख संवाददाता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता का उपयोग केवल जटिल समस्याओं के समाधान और कार्यक्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का प्रभावी माध्यम भी बनाया जाना चाहिए। ये बात ग्राफिक एरा में सतत कंप्यूटेशनल तकनीक पर चल रही कार्यशाला के समापन पर विशेषज्ञों ने कही। यह भी पढ़ें- एआई और मशीन लर्निंग पर पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम संपन्नसस्टेनेबिलिटी के लिए तकनीकी विकास आईआईआईटीएम ग्वालियर के निदेशक एवं आईईईई यूपी सेक्शन के इमीडिएट पास्ट चेयर डा. एसएन सिंह ने कहा कि तेजी से बढ़ती कम्प्यूटिंग क्षमताओं के साथ सस्टेनेबिलिटी को तकनीकी विकास का अहम हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटिंग तकनीकों को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि व...