नई दिल्ली, मार्च 2 -- सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा कथित तौर पर एआई से तैयार किए गए अस्तित्वहीन और फर्जी फैसलों पर भरोसा करने और उसके आधार पर फैसला पारित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने जज को आगाह करते हुए कहा है कि अस्तित्वहीन और फर्जी फैसलों पर भरोसा करके पारित आदेश न सिर्फ विधिक त्रुटि है बल्कि यह कदाचार की श्रेणी में आ सकता है और इसके कानूनी परिणाम होंगे। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस नरसिम्महा ने जज को आगाह करते हुए कहा कि 'ट्रायल कोर्ट द्वारा एआई से तैयार गैर-मौजूद फर्जी अथवा कृत्रिम निर्णयों का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि हम अभी से ही यह स्पष्ट कर दे...