मुंगेर, मार्च 12 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। पहाड़ की तराई में स्थित ऋषिकुंड के गर्म जल को संरक्षित कर सिचाई की सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर न तो जिला प्रशासन ही ध्यान दे रहा है, और न ही जनप्रतिनिधि। जबकि इस को लेकर अक्सर स्थानीय किसानों की ओर से मांग की जा रही है। अगर जल संरक्षण के लिये डेम का निर्माण किया जाए तो बारिश नहीं होने पर भी किसान साल में दो फसल आसानी से उगा सकेंगे। किसानों का कहना है कि ऋषिकुंड के पहाड़ियों से निकलने वाला जल बेकार में बहकर नदी में मिल जाता है। जिससे इसका लाभ हम किसानों को नहीं मिल पाता है। जल छाजन योजना के तहत किया गया था नहर, तालाब आदि का निर्माणपूर्व में जल छाजन योजना के तहत ऋषिकुंड के जल को संरक्षित करने के लिए तालाब एवं नाला का निर्माण किया गया था। लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद मिट्टी भर जाने से नाला की गहराई क...