गंगापार, अप्रैल 10 -- भारतगंज, हिसं। कस्बा भारतगंज स्थित हज़रत सोना शाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह परिसर में आयोजित दो दिवसीय उर्स के दूसरे दिन गुरुवार की रात बाद नमाज़-ए-ईशा महफ़िल-ए-शमां का आयोजन हुआ।सूफियाना कलामों की गूंज से पूरा परिसर इश्क-ए-हकीकी के रंग में रंगा नजर आया। मशहूर कव्वाल दानिश मोनिश अली खान (रामपुर, यूपी) ने जब "तेरे दर के भीख पर है मेरा आज़ तक गुज़ारा,कभी कुछ मिला तसद्दुक, कभी कुछ मिला उतारा..." जैसा दिल को छू लेने वाला कलाम पेश किया, तो अकीदतमंद झूम उठे। पूरी महफ़िल 'वाह-वाह' की गूंज से भर गई। लोगों ने ईनाम भी ख़ूब पेश किया। वहीं, अलीगढ़ से आए गुलाम फरीद पेंटर ने बेहतरीन अंदाज़ में "उस हुस्न मुकम्मल से बालों से तबियत है,सूरत भी नहीं देखी फिर भी मोहब्बत है..." जैसे दिलकश कलाम से महफ़िल में चार चांद लगा दिए। उनके कलामों क...