हेमलता कौशिक, मई 2 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी अपराधी का साथी पहले से पैरोल पर बाहर है तो केवल इस आधार पर दूसरे अपराधी को फरलो देने से इनकार नहीं किया जा सकता है। अदालत ने उम्रकैद की सजा काट रहे एक व्यक्ति को 2 हफ्ते की फरलो पर रिहा करने का आदेश दिया ताकि वह अपनी 16 साल की बेटी का 11वीं कक्षा में दाखिला करा सके। जेल प्रशासन ने पहले उसे छोड़ने से मना कर दिया था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अच्छे व्यवहार के लिए मिलने वाली फरलो पर सह-दोषी के बाहर होने से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। खासकर तब जब मामला बच्चे के भविष्य और जरूरी पारिवारिक जिम्मेदारी से जुड़ा हो।जेल अधिकारियों ने क्यों नहीं किया रिहा? जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने यह आदेश आजीवन कारावास काट रहे दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस दोषी की 2 हफ्...
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