बाराबंकी, अप्रैल 13 -- रामसनेहीघाट। कभी क्षेत्र के दो सौ से अधिक गांवों को संचार सुविधा से जोड़ने वाला बीएसएनएल का टेलीफोन एक्सचेंज आज अपनी ही बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। चार दशक पूर्व स्थापित इस एक्सचेंज ने एक समय ग्रामीणों को देश-विदेश तक जोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन अब यह उपेक्षा का शिकार होकर लगभग निष्प्रभावी हो चुका है। स्थानीय मुख्यालय पर बने इस टेलीफोन एक्सचेंज से आसपास के कई छोटे एक्सचेंज जुड़े हुए थे, जिनके माध्यम से सैकड़ों गांवों में टेलीफोन लाइन बिछाई गई थी। एक समय हजारों उपभोक्ताओं से गुलजार रहने वाला यह केंद्र अब सिमटकर महज दो दर्जन सक्रिय टेलीफोनों तक रह गया है। आधुनिक संचार माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच विभागीय उदासीनता ने इसकी स्थिति और अधिक खराब कर दी है।एक्सचेंज पर अधिकारियों सहित लगभग आधा दर्जन कर्मचारियों ...
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