अलीगढ़, जून 23 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। पति की मृत्यु केवल जीवनसाथी का जाना नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से में महिला के वजूद पर ही सवालिया निशान खड़ा कर देता है। इसी कड़वी सच्चाई को बदलने और उनके अधिकारों की आवाज बुलंद करने के लिए हर साल 23 जून को 'अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस' मनाया जाता है। ताले और तालीम की नगरी अलीगढ़ में एक तरफ जहां विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की हजारों विधवा महिलाएं आज भी घूंघट के पीछे अपनों के ही दिए दर्द, संपत्ति विवाद और सामाजिक उपेक्षा से जूझ रही हैं। आंकड़े बताते हैं कि एक साल में ही विधवा महिलाओं के उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पैतृक संपत्ति पर कब्जे को लेकर 1,200 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है。

सर्वे और शोध : पिछले 10 वर्षो...