फर्रुखाबाद कन्नौज, जनवरी 5 -- राजीव सक्सेना फर्रुखाबाद।उपभोक्ता अदालत में ऊपर दिये गये मामले सिर्फ वानगी है। कुछ इसी तरह के सैकड़ों मामले उपभोक्ता अदालत में इंसाफ की सुस्त चाल से लंवित चल रहे हैं। जबकि उपभोक्ता अदालत को आम लोगों के लिए त्वरित और सुगम न्याय का माध्यम भले ही माना जाता है मगर यह भरोसा कमजोर सा पड़ता दिख रहा है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आंकड़ों पर ही गौर करेंगे तो हकीकत सामने दिखायी पड़ेगी। पिछले पांच वर्षो में इंसाफ की सुस्त चाल का ही नतीजा हैकि 536 केस उपभोक्ता अदालत में अटके हैं। पांच सालों में 1189 ही केस निपट सके हैं। इस तरह से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाये तो कई ऐसे मामले हैं जो कि वर्षो से निपटारे का इंतजार कर रहे हैं। उपभोक्त अदालत में कंपनी से जुड़े मामलों के निस्तारण में जब देरी होती है तो इसका सीधा फायदा उपभ...
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