औरैया, जनवरी 5 -- जिले में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए वर्ष 2008 में उपभोक्ता फोरम की स्थापना की गई थी। उद्देश्य था, उपभोक्ताओं को सस्ता, सरल और त्वरित न्याय। लेकिन 17 साल बाद स्थिति यह है कि उपभोक्ता अदालत में दर्ज 646 मामले आज भी लंबित पड़े हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ न्याय प्रणाली की सुस्ती को उजागर करता है, बल्कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 38(7) के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी उपभोक्ता शिकायत का निस्तारण नोटिस मिलने के तीन माह के भीतर किया जाए। यदि मामले में सामान की जांच या विश्लेषण जरूरी हो, तब भी पांच माह के भीतर फैसला देना अनिवार्य है। इसके बावजूद जिले में ऐसे दर्जनों मामले हैं, जो दो से तीन साल या उससे भी अधिक समय से लंबित हैं। पड़ताल में सामने आया कि 200...
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