मोतिहारी, मार्च 9 -- होली में परदेश से अपने घर लौटे प्रवासी मजदूरों का रोजी रोटी की तलाश में पलायन शुरू हो गया है। पूर्वी चंपारण से मजदूर बड़ी संख्या में प्रतिदिन ट्रेन व बस पकड़कर परदेश कूच कर रहे हैं। घर परिवार चलाने के लिए बाहर जाकर दो पैसे कमाना मानो इनकी नियति बन चुकी है। होली के समय जैसे-तैसे ट्रेनों में ठूंस ठूंसकर अपने घर लौटे थे। घर परिवार के साथ बमुश्किल दस दिन भी नहीं बिता की रोजी-रोटी की तलाश मे फिर परदेश लौटने की बेचैनी बढ़ गई है। जिले से बड़ी संख्या में मजदूर ट्रेन से बाहर के राज्यों में काम के लिए जाने लगे हैं। लिहाजा जेनरल बोगी में सैकड़ों किलोमीटर दूर यात्रा करने की मजबूरी होती है। बिहार में सरकारी योजनाओं का उचित लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा है। फिरोज, रवींद्र के अनुसार मजदूरों की संख्या इतनी अधिक है कि उतने बिहार में रोजग...