वाराणसी, जुलाई 5 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। तकनीकी प्रगति और डिजिटल कनेक्टिविटी के दौर में समाज एक नई मनोवैज्ञानिक चुनौती का सामना कर रहा है। मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इस बढ़ती प्रवृत्ति को इंसान को बीमार करने वाला बताते हुए चिंता जताई है। क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, आईएसएसी और एनएसडी के अंतर्गत साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर प्रशस्ति पाण्डेय ने कहा कि समाज में बढ़ती उदासीनता मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संबंधों को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। यह केवल भावनात्मक निष्क्रियता नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति उत्तरदायित्व और सहानुभूति के क्षीण होने की प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, कार्यस्थलों का दबाव, डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग और लगातार नकारात्मक सूचनाओं के संपर्क में रहने से व्यक्ति मानसिक रूप से स्वयं...