नई दिल्ली, नवम्बर 15 -- हिंदू धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बहुत अधिक महत्व है। यह वही तिथि मानी जाती है जब स्वयं देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था। हर साल यह व्रत मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी पर रखा जाता है। इसे सभी एकादशी व्रतों की पहली और मुख्य एकादशी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था। इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर 2025 को रखा गया। पुराणों के अनुसार, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में थे, तब मुर नामक राक्षस ने उन पर आक्रमण कर दिया। उसी समय भगवान विष्णु के शरीर से एक दिव्य तेज निकला और एक स्त्री प्रकट हुईं। यही थीं देवी एकादशी। उन्होंने मुर का वध किया। भगवान विष्णु उनकी शक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें "एकादशी" नाम देकर यह वरदान दिया कि जो भी भक्त इस तिथि पर व्रत रखेगा उसके सभी पाप नष्ट होंगे और उसे मोक्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.