उत्तर भारत के लिए भूजल क्षरण चुनौती : डॉ. वीरेंद्र एम. तिवारी
वाराणसी, अक्टूबर 6 -- वाराणसी। सीएसआईआर-एनईआईएसटी जोरहाट के निदेशक और भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र एम. तिवारी ने कहा कि हमारे आसपास मौजूद चट्टानों और भू-भाग से लेकर समाज की जल आवश्यकताओं तक, भूविज्ञान दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भू-विज्ञान दिवस-2026 पर बीएचयू के भू विज्ञान विभाग में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. तिवारी ने उत्तरी भारत में तेजी से हो रहे भूजल क्षरण पर प्रो. केके माथुर स्मृति व्याख्यान में चर्चा करते हुए बताया कि कृषि मांग, जलवायु परिवर्तनशीलता और फसल प्रतिरूप में बदलाव इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। डॉ. तिवारी ने गंगा बेसिन सहित विभिन्न क्षेत्रों के उदाहरण देते हुए वैज्ञानिक आधार पर भूजल आकलन, लक्षित भूजल पुनर्भरण, फसल विविधीकरण और जलवायु-अनुकूल फसलों को जल संक...
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