प्रयागराज, मार्च 13 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करते समय हर मामले में सुरक्षा बांड जमा कराने की शर्त लगाना आवश्यक नहीं है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम कानपुर की अलका सिंघानिया बनाम शिल्पी अग्रवाल मामले में यह आदेश दिया। मामले के अनुसार, शकुंतला देवी, निवासी जनरलगंज, कानपुर नगर का 30 अक्टूबर 2008 को निधन हो गया था। उनके पीछे उनकी दो बेटियां अलका सिंघानिया (याचिकाकर्ता) और शिल्पी अग्रवाल (प्रतिवादी) ही कानूनी उत्तराधिकारी हैं। मृतक के नाम पर रिलायंस इंडस्ट्री के शेयर थे। इन्हें प्राप्त करने के लिए अलका सिंघानिया ने उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की मांग करते हुए अदालत में वाद दायर किया था। कानपुर नगर के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने 18 जनवरी 2025 को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की अनुमति तो दे दी, लेकिन...
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