उत्तराखंड में नेताओं का टोटा; नहीं मिल पा रहे दावेदार, पौड़ी में सबसे बुरा हाल
नई दिल्ली, अक्टूबर 1 -- विनोद मुसान, देहरादून उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन का असर अब पंचायती राज व्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। लगातार खाली हो रहे गांवों के कारण स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधि तक नहीं मिल पा रहे हैं। जून 2025 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों और उसके बाद फरवरी 2026 में कराए गए पहले उप-चुनाव के बावजूद, अब दूसरे उप-चुनाव की नौबत आ गई है। प्रदेश में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) और ग्राम पंचायत सदस्यों के हजारों पद खाली पड़े हैं। 12 अक्तूबर को होने वाले मतदान और 14 अक्तूबर को होने वाली मतगणना से ठीक पहले स्थिति यह है कि कई छोटी ग्राम सभाओं में चुनाव लड़ने को प्रत्याशी मिलना मुश्किल हो रहा है। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में अक्टूबर महीने में भी ज्यादा आएगा बिजली का बिल; किस पर कितना बोझ राज्य निर्वाचन आय...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.