हरिद्वार, मार्च 25 -- उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित केदारमानस पंचाग संशोधन त्रिदिवसीय कार्यशाला का बुधवार को विधिवत समापन हो गया। कार्यशाला में देशभर के प्रख्यात ज्योतिषाचार्यों ने सहभागिता करते हुए पंचांग को अंतिम रूप दिया। विवि के कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडेय ने कहा कि उत्तराखंड की धरती प्राचीन काल से ही ज्योतिष विद्वानों की जन्मस्थली रही है। यहां के विद्वानों की भविष्यवाणियां और कालगणना की परंपरा विश्वसनीय मानी जाती हैं। विश्वविद्यालय इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय देवप्रयाग परिसर के निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया। कार्यशाला के संयोजक एवं वरिष्ठ प्रो. मोहन चंद्र बलोदी ने बताया कि तीन दिवसीय विमर्श के बाद पंचांग को संशोधित कर लोकार्पण क...