बलरामपुर उतरौला। नूर मोहम्मद, दिसम्बर 11 -- यूपी के जिले बलरामपुर के उतरौला कस्बे की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। यहां रामलीला की शुरुआत वर्ष 1904 में हुई थी। इसकी नींव बाबा जयकरन गिरि संत ने मुगल शासक राजा मुमताज अली खां के समय में रखी थी। राजा मुमताज अली खां ने रामलीला मंचन के लिए भूमि दान में दी थी जिससे इस आयोजन को स्थायित्व मिला। तब से लेकर आज तक यह रामलीला हर वर्ष लगातार होती चली आ रही है। यही नहीं यह आयोजन नगर के इतिहास और लोक जीवन का अभिन्न हिस्सा भी बन चुका है। शुरुआती दौर में रामलीला का मंचन पूरी तरह स्थानीय कलाकारों के माध्यम से होता था। पंडित सूर्यमन पाण्डेय पंडित महावीर प्रसाद झा और पंडित वृजलाल महाराज जैसे कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से रामलीला को पहचान दिलाई। खा...
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