ईसीएल व्यवस्था को समझने के लिए आईसीएमएआई ने दो हैंडबुक जारी की
नई दिल्ली, अगस्त 18 -- नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई) ने अपेक्षित ऋण हानि (ईसीएल) और बैंक ऋण पुनर्गठन पर मंगलवार को दो हैंडबुक जारी कीं। इनका उद्देश्य बैंकों, कर्जदारों, एमएसएमई और वित्तीय पेशेवरों को भारतीय रिजर्व बैंक की ईसीएल व्यवस्था के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन देना है। ईसीएल व्यवस्था एक अप्रैल 2027 से लागू होगी।
ईसीएल हैंडबुक की विशेषताएँ ईसीएल हैंडबुक में बैंकिंग क्षेत्र में संभावित ऋण हानि के आकलन से जुड़े स्टेज-1, 2 और 3, डिफॉल्ट की संभावना (पीडी), डिफॉल्ट होने पर संभावित नुकसान (एलजीडी), डिफॉल्ट के समय जोखिम (ईएडी), आर्थिक परिस्थितियों, डेटा, मॉडल, तकनीक, लेखांकन, ऑडिट और रिपोर्टिंग जैसे विषय शामिल किए गए हैं। इसमें केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरण भी दिए गए हैं।
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