ईश्वर के जप से नहीं, अनुराग से मिलती है भक्ति: राहुल
जौनपुर, जून 13 -- बदलापुर, हिन्दुस्तान संवाद। कस्बे के बरौली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को कथावाचक राहुल पांडेय पराशर ने श्रोताओं को कहा कि 'मिलहि न रघुपति बिनु अनुरागा, किये कोटि जप जग्य बिरागा' यानी ईश्वर की भक्ति अनुराग से ही मिलती है। जप जग्य वैराग से नहीं। अगर ईश्वर के प्रति अनुराग है तो वे भक्त के पास स्वयं चलकर आते हैं।
कथा का उद्देश्य उन्होंने कहा कि प्रभु प्रेम के भूखे होते हैं पकवान के नहीं। श्री कृष्ण भगवान ने दुर्योधन के घर 56 प्रकार के व्यंजन का त्यागकर बिदुर के घर केले का छिलका ग्रहण किया। प्रभु ने स्वयं कहा कि या तो भूख लगने पर भोजन ग्रहण करना चाहिए या फिर खिलाने वाले में अद्भुत प्रेम हो। अन्यथा की स्थिति में अमृत भी जहर हो जाता है।
भगवान कृष्ण का अवतार उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण के प्रगट होने का उद्देश्...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.